September 22, 2022

गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है?

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वैसे आपके जानकारी के लिए बता दूँ की, गणेश चतुर्थी भगवान गणेश जी के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है. वह शिव और पार्वती के पुत्र हैं. गणेश चतुर्थी वैसे तो भारत के कई राज्यों में मनाया जाता है, लेकिन महाराष्ट्र के लोगो को इस त्यौहार का बेसब्री से इंतज़ार होता है.

भगवान गणेश ज्ञान, समृद्धि और सौभाग्य के प्रतीक हैं. भारत में लोग कोई भी नया काम शुरू करने से पहले भगवान गणेश की पूजा करते है. भगवान गणेश को विनायक और विघ्नहर्ता के नाम से भी बुलाया जाता है. गणेश जी को ऋद्धि-सिद्धि व बुद्धि का दाता भी माना जाता है. इसलिए आज हमने सोचा की क्यूँ न आप लोगों की गणेश चतुर्थी क्या है इसे क्यों मनाया जाता है के विषय में पूरी जानकारी प्रदान करेंगे. तो फिर चलिए शुरू करते हैं.

गणेश चतुर्थी क्या है?

गणेश चतुर्थी को विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है, यह असल में एक हिंदू त्योहार है. इस त्योहार के दौरान लोग भगवान गणेश की बहुत भक्ति करते हैं. गणेश चतुर्थी की शुरुआत वैदिक भजनों, प्रार्थनाओं और हिंदू ग्रंथों जैसे गणेश उपनिषद से होती है. प्रार्थना के बाद गणेश जी को मोदक का भोग लगाकर, मोदक को लोगो में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है.

इन दिनों लोग भंडारे भी करवाते हैं. और बहुत अच्छे से साज-सजावट भी होती है. इस त्योहार में पूरा माहौल भक्तिमय हो जाता है. गणेश चतुर्थी के दौरान सुबह और शाम गणेश जी की आरती की जाती है और लड्डू और मोदक का प्रसाद चढ़ाया जाता है. सबसे ज्यादा यह उत्सव महाराष्ट्र में मनाया जाता है और वहाँ की गणेश चतुर्थी देखने दूर-दूर से लोग आते हैं.

गणेशोत्सव क्यों 10 दिनों तक मनाया जाता है?

दरअसल, पेशवा शासन के समय गणेश चतुर्थी काफी भव्य रुप से मनाया जाता था। मगर जब अंग्रेजों ने भारत पर कब्जा किया तो उन्होंने पेशवाओं के राज्य पर भी अपना अधिकार जमा लिया। इसके बाद गणेशोत्सव की भव्यता में साल दर साल कमी आने लगी लेकिन इसे मनाने की पंरपरा बनी रही।

ऐसे में उन दिनों महान क्रांतिकारी व जननेता लोकमान्य तिलक ने हिंदू धर्म को संगठित करने का विचार बनाया। उन्होंने कहा कि भगवान गणेश जी ही मात्र एक ऐसे देवता हैं, जिन्हें सभी समाज के लोग पूजनीय मानते हैं और अंग्रेज भी इसमें दखलअंदाजी नहीं करेंगे। ऐसे में उन्होंने सबको एकजुट करने के लिए सार्वजनिक गणेशोत्सव कि शुरुआत की, जिसमें 10 दिनों तक भगवान गणेश का ये उत्सव हर साल जोर-शोर से मनाया जाने लगा। इससे हिंदूओं में एकता बढ़ती चली गई। साथ ही देश को आजादी दिलाने में भी काफी मदद मिली थी।

भगवान गणेश की स्थापना कैसे करें ?

गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणपति की प्रतिमा स्थापित की जाती है। बड़े धूमधाम से घर में भगवान गणेश को विराजित किया जाता है। उन्हें 10 दिनों तक घर में रखा जाता है। उनकी विधि-विधान से पूजा की जाती है।

गणेश चतुर्थी के दिन सुबह स्नान आदि के बाद साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें। भगवान का साफ जल से अभिषेक करें। फिर उन्हें अक्षत, दुर्वा, फूल, फल आदि अर्पित करना चाहिए। मोदक का भोग लगाएं और आरती करें। मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के दिन पूजा करने से करते बप्पा भक्तों से प्रसन्न होते हैं। वहीं सब संकटों को दूर करते हैं। गजानन की कृपा पाने के लिए हर दिन गणेश चालीसा का पाठ करना चाहिए।

गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है? 

श्री गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को हुआ था। इसीलिए हर साल इस दिन गणेश चतुर्थी धूमधाम से मनाई जाती है। भगवान गणेश के जन्म दिन के उत्सव को गणेश चतुर्थी के रूप में जाना जाता है। गणेश चतुर्थी के दिन, भगवान गणेश को बुद्धि, समृद्धि और सौभाग्य के देवता के रूप में पूजा जाता है। यह मान्यता है कि भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष के दौरान भगवान गणेश का जन्म हुआ था।

गणेश चतुर्थी की कहानी

हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार गणेश के जन्म से जुड़ी कई कहानियां हैं। तो आइए जाने ऐसी ही दो कहानियों के बारे में । कहते हैं कि देवी पार्वती ने अपने शरीर से उतारी गई मैल से बनाया था। जब वो नहाने गई तो गणेश को अपनी रक्षा के लिए बाहर बिठा दिया। शिव भगवान जो पार्वती के पति हैं जब घर लौटे तो अपने पिता से अनजान गणेश ने उन्हें रोकने की कोशिश की जिससे शिव को क्रोध आ गया और उन्होने गणेश का सिर काट दिया।

जब देवी पार्वती को इस सब के बारे में पता चला तो वो शिव जी से रूष्ट हो गई जिस पर शिव ने उन्हें गणेश का जीवन वापस लाने का वादा कर उस पर हाथी का सिर लगा दिया और इस तरह फिर से गणेश का जीवनदान मिला। लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि देवताओं के अनुरोध करने पर शिव और पार्वती ने गणेश को बनाया था जिससे वो राक्षसों का वध कर सकें और यही कारण है कि उन्हें विघनकर्ता भी कहा जाता है।

गणेश चतुर्थी की पूजन विधि 

Ganesh Chaturthi Puja Samagri : गणपति बप्‍पा की स्‍थापना से पहले पूजा की सारी सामग्री एकत्रित कर लें। पूजा के लिए चौकी, लाल कपड़ा, गणेश प्रतिमा, जल कलश, पंचामृत, लाल कपड़ा, रोली, अक्षत, कलावा, जनेऊ, गंगाजल, इलाइची-लौंग, सुपारी, चांदी का वर्क, नारियल, सुपारी, पंचमेवा, घी-कपूर की व्‍यवस्‍था कर लें। लेक‍िन ध्‍यान रखें क‍ि श्रीगेश को तुलसी दल व तुलसी पत्र नहीं चढ़ाना चाहिए। इसके स्‍थान पर गणपत‍ि बप्‍पा को शुद्ध स्‍थान से चुनी हुई दूर्वा जि‍से कि अच्‍छे तरीके से धो ल‍िया हो, अर्पित करें।

गणेश उत्सव कब से मनाया जाता है?

यह उत्सव वैसे तो कई वर्षो से मनाया जा रहा है लेकिन सन 1893 से पूर्व यह केवल घरो तक ही सीमित था उस समय सामूहिक उत्सव नहीं मनाया जाता था और न ही बड़े पैमानों पर पंडालों में इस तरह मनाया जाता था।

सन 1893 में बाल गंगा धर तिलक ने अंग्रजो के विरुद्ध एक जुट करने के लिए एक पैमाने पर इस उत्सव का आयोजन किया जिसमे बड़े पैमाने पर लोगो ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया और इस प्रकार पूरे राष्ट्र में गणेश चतुर्थी मनाया जाने लगा।

बालगंगाधर तिलक ने यह आयोजन महाराष्ट्र में किया था इसलिए यह पर्व पूरे महाराष्ट्र में बढ़ चढ़ कर मनाया जाने लगा। तिलक उस समय स्वराज्य के लिए संघर्ष कर रहे थे और उन्हें एक ऐसा मंच चाहिए था जिसमे माध्यम से उनकी आवाज अधिक से अधिक लोगो तक पहुंचे और तब उन्होंने गणपति उत्सव का चयन किया और इसे एक भव्य रूप दिया जिसकी छवि आज तक पूरे महाराष्ट्र में देखने को मिलता है।

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