रक्षा बंधन क्यों मनाते है? | राखी बांधने का शुभ मुहूर्त क्या हैं? 2021

इस आर्टिकल मे आपको रक्षाबंधन 2021 कब है, और क्यों मनाया जाता है, इतिहास, कहानी, (Raksha Bandhan kab aur Kyu Manaya Jata hai in Hindi) रक्षाबंधन से जुड़े हर सवाल का जवाब मिलेगा |

रक्षा बंधन क्यों मनाते है?(Raksha Bandhan Kyu Manate Hai In Hindi)

ये सवाल की रक्षा बंधन हम क्यूँ मानते हैं आप में से बहुतों के मन में जरुर होगा. तो इसका जवाब है की यह त्यौहार असल में इसलिए मनाया जाता है क्यूंकि ये एक भाई का अपने बहन के प्रति कर्तव्य को जाहिर करता है.

इस मौके पर, एक बहन अपने भाई के कलाई में राखी बांधती है. वहीँ वो भगवान से ये मांगती है की उसका भाई हमेशा खुश रहे और स्वस्थ रहे. वहीँ भाई भी अपने बहन को बदले में कोई तौफा प्रदान करता है और ये प्रतिज्ञा करता है की कोई भी विपत्ति आ जाये वो अपने बहन की रक्षा हमेशा करेगा.

रक्षा बंधन कब मनाया जाता हैं? (Raksha Bandhan Kab Manaya Jata Hai)

यह त्यौहार प्रति वर्ष  हिन्दू पचांग के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता हैं जो कि ज्यादातर अंग्रेजी पंचाग के अनुसार अगस्त माह में आता हैं .

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रक्षा बंधन कब हैं? 2021 | राखी बांधने का शुभ मुहूर्त क्या हैं?

रक्षा बंधन का त्यौहार कब है? 22 अगस्त 2021
दिन रविवार
 शुभ मुहुर्त सुबह 6:15 बजे से रात 7:40 बजे तक
कुल अवधि 13 घंटे 25 मिनट
रक्षा बंधन अपरान्ह मुहुर्त दोपहर 1:42 से 4:18 तक
रक्षा बंधन प्रदोष मुहुर्त शाम 8:08 से 10:18 रात्रि तक

रक्षा बंधन के त्यौहार का महत्व 

रक्षाबंधन भाई बहनो के बीच मनाया जाने वाला पर्व है. इस दिन बहन अपने भाइयों को रक्षाधागा बंधती हैं और भाई अपनी बहनों को जीवन भर उनकी रक्षा करने का वचन देते हैं. इस त्यौहार के दिन सभी भाई बहन एक साथ भगवान की पूजा आदि करके आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

रक्षाबंधन कैसे मनाया जाता हैं ?

रक्षा बंधन के दिन बहन अपने भाई के माथे पर तिलक लगाती है और हाथ की कलाई पर राखी बांधती है। अपना प्यार व्यक्त करती है। वह अपने भाई की रक्षा के लिए ईश्वर से प्रार्थना करती है।

रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है? Raksha Bandhan Kyu Manaya Jata Hai

रक्षाबंधन क्यों मनाते है? रक्षा बंधन भाई और बहन के बीच प्यार जगाने के लिए मनाया जाता है। रक्षा बंधन का त्यौहार सदियों से चला आ रहा है। इस विशेष त्यौहार की शुरूआती कैसे हुई और raksha bandhan मनाने के पीछे कई कहानियां है। आईये जानते है।

रक्षा बंधन की कहानी – रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूँ

रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूँ की यह कहानी उस समय की है जब मध्यकालीन युग में राजपूत और मुस्लिमों के बीच संघर्ष चल रहा था। रानी कर्णावती चित्तोड़ के राजा की विधवा पत्नी थी ऐसे में वो अकेली अपने राज्य की रक्षा कैसे कर सकती थी।

कहा जाता है, इस दौरान उसने खुद को और अपनी प्रजा को सुल्तान बहादुर शाह (जोकि गुजरात का शासक था) से बचाने के लिए सम्राट हुमायूँ से मदद मांगी और उन्हें एक राखी भेजी।

उस राखी को पाकर हुमायूँ ने रानी कर्णावती को बहन का दर्जा दिया और उसके राज्य को सुल्तान बहादुर शाह से सुरक्षा दी।

तब से या इससे भी पहले की कई और कहानियां है जिनसे राखी, रक्षा बंधन के त्यौहार की शुरूआत हुई। इसके अलावा और भी कई कहानियां है जिनसे रक्षा बंधन की शुरूआत हुई।

लेकिन ये कहानी रक्षा बंधन से सबसे ज्यादा जुडी हुयी है और अधिकतर लोग इसी को रक्षाबंधन मनाने का कारण मानते है।

 माता लक्ष्मी और राजा बलि की कहानी

असुर सम्राट बलि एक बहुत ही बड़ा भक्त था भगवान विष्णु का. बलि की इतनी ज्यादा भक्ति से प्रसन्न होकर विष्णु जी ने बलि के राज्य की रक्षा स्वयं करनी शुरू कर दी. ऐसे में माता लक्ष्मी इस चीज़ से परेशान होने लगी. क्यूंकि विष्णु जी अब और वैकुंठ पर नहीं रहते थे.

अब लक्ष्मी जी ने एक ब्राह्मण औरत का रूप लेकर बलि के महल में रहने लगी. वहीँ बाद में उन्होंने बलि के हाथों में राखी भी बांध दी और बदले में उनसे कुछ देने को कहा. अब बलि को ये नहीं पता था की वो औरत और कोई नहीं माता लक्ष्मी है इसलिए उन्होंने उसे कुछ भी मांगने का अवसर दिया.

इसपर माता ने बलि से विष्णु जी को उनके साथ वापस वैकुंठ लौट जाने का आग्रह किया. इसपर चूँकि बलि से पहले ही देने का वादा कर दिया था इसलिए उन्हें भगवान विष्णु को वापस लौटना पड़ा. इसलिए राखी को बहुत से जगहों में बलेव्हा भी कहा जाता है.

कृष्ण और द्रौपदी की कहानी

शिशुपाल का वध करते समय कृष्ण की तर्जनी में चोट आ गई, तो द्रौपदी ने लहू रोकने के लिए अपनी साड़ी फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दी थी। यह भी श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था। भगवान ने चीरहरण के समय उनकी लाज बचाकर यह कर्ज चुकाया था। उसी समय से राखी बांधने का क्रम शुरु हुआ। वहीं उन्होंने उनसे ये भी वादा किया की समय आने पर वो उनका जरुर से मदद करेंगे.

बहुत वर्षों बाद जब द्रौपदी को कुरु सभा में जुए के खेल में हारना पड़ा तब कौरवों के राजकुमार दुहसासन ने द्रौपदी का चिर हरण करने लगा. इसपर कृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा करी थी और उनकी लाज बचायी थी.

हमारे देश में राखी का क्या महत्व है?

यह पर्व भाई -बहन के रिश्तों की अटूट डोर का प्रतीक है. भारतीय परम्पराओं का यह एक ऎसा पर्व है, जो केवल भाई बहन के स्नेह के साथ साथ हर सामाजिक संबन्ध को मजबूत करता है. इस लिये यह पर्व भाई-बहन को आपस में जोडने के साथ साथ सांस्कृ्तिक, सामाजिक महत्व भी रखता है.

राखी कौन से hand में बांधी जाती है?

राखी को हमेशा दायी कलाई पर ही बांधना चाहिए । रक्षासूत्र को दायीं कलाई पर बांधे जाने के पीछे भी कई कारण हैं। मान्यताओं के अनुसार भाई की दाहिनी कलाई पर ही बहन को राखी बांधना चाहिए। माना जाता है कि शरीर का दाहिना हिस्सा पवित्र होता है। इसलिए धार्मिक कार्यों में सभी काम सीधे हाथ से ही किए जाते हैं।

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