September 22, 2022

गुलाम नबी आजाद ने दिया इस्तीफा, बीजेपी को करेंगे सहयोग

ग़ुलाम नबी आज़ाद कांग्रेस में तमाम पदों पर रहे। उन्होंने यूथ कांग्रेस से लेकर सांसद, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष तक के महत्वपूर्ण पद को संभाला है। ऐसे में अब उनका पार्टी से अलग होना एक साथ कई संदेश देता है।

ता दें कि शुक्रवार, 26 अगस्त को ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता समेत सभी पदों से इस्तीफ़ा दे दिया। आज़ाद के समर्थन में जम्मू-कश्मीर के पांच और कांग्रेसी नेताओं के भी इस्तीफा सामने आए। अपने पाँच पन्नों के इस्तीफ़ा पत्र में ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कांग्रेस के साथ अपने लंबे संबंधों का ज़िक्र किया है, साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से अपने रिश्तों को भी याद किया है। आज़ाद ने पत्र में लिखा है कि कांग्रेस पार्टी में ऐसी स्थिति पैदा हो गई है, जहाँ से वापस लौटना मुश्किल है।

राहुल गांधी से नाराज़गी

राहुल गांधी का ज़िक्र करते हुए लिखा है कि कांग्रेस पार्टी की ये हालत इसलिए हुई है क्योंकि पिछले आठ वर्षों से नेतृत्व ने एक ऐसे व्यक्ति को आगे किया, जो कभी गंभीर ही नहीं था। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की राजनीति में एंट्री और ख़ासकर जब वर्ष 2013 में जब उन्हें पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया, उसके बाद पार्टी के अंदर की सलाह लेने की प्रक्रिया को उन्होंने पूरी तरह ख़त्म कर दिया।

जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस में उथल-पुथल

बीते साल सितंबर आते-आते पार्टी ने गुलाम नबी आजाद को पार्टी महासचिव पद से हटा दिया। फिर राज्यसभा चुनाव में भी पार्टी ने टिकट नहीं दिया। बीते लंबे समय से जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस में एक तरह की उथल-पुथल सी मची हुई थी। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी में अपने पदों से इस्तीफ़ा देकर पार्टी के मौजूदा प्रदेश नेतृत्व के ख़िलाफ़ खुलकर बग़ावत की। ऐसे में ग़ुलाम नबी आज़ाद के करीबी नेताओं के इस्तीफ़ों के बाद राज्य में उन्हें लेकर भी कई तरह की अटकलें सामने आ रही थीं, जिसे उन्होंने खुद ख़ारिज किया था। लेकिन जम्मू-कश्मीर प्रदेश कांग्रेस के मौजूदा नेतृत्व से उनकी नाराज़गी और फिर से राज्यसभा जाने की उनकी महत्वकांक्षा किसी से छिपी नहीं थी। शायद इसलिए इंदिरा गांधी, संजय गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी, और फिर राहुल गांधी, मतलब चार पीढ़ी के साथ राजनीतिक सीढ़ी चढ़ने वाले ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कांग्रेस से अपना 50 साल पुराना रिश्ता तोड़ लिया।

पार्टी के प्रतिभाशाली लोग इसे छोड़ कर क्यों जा रहे हैं?

वैसे अंदरूनी फूट से जूझ रही कांग्रेस का संकट ख़त्म होता नज़र नहीं आ रहा है। पांच राज्यों में चुनाव से पहले पार्टी में जिस एकता की ज़रूरत महसूस की जा रही थी, वह दूर की कौड़ी नज़र आने लगी है। कांग्रेस को इस बात की चिंता करनी होगी पार्टी के प्रतिभाशाली लोग इसे छोड़ कर क्यों जा रहे हैं। कांग्रेस से हाल के दिनों में कई नेता निकल गए। कपिल सिब्बल, ज्योतिरादित्य सिंधिया, अश्विनी कुमार, आरपीएन सिंह, सुनील जाखड़, हार्दिक पटेल। 2017 में हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकुर और जिग्नेश मेवाणी की तिकड़ी की बदौलत ही कांग्रेस ने बीजेपी को 100 से कम सीटों पर कामयाबी हासिल की थी’।

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